Digital clock

Monday, 30 October 2017

रावण कियाक नहि मरैत अछि ?


रामलीलाक आयोजनक तैयारी पूर्ण भ' गेल छल तहन ई प्रश्न उठल जे रावणक पुतला केना आ कतेक मे ख़रीदल जाए ? ओना रामलीला आयोजनक सचिव रामप्रसाद छल तैं इ भार ओकरे पर द' देल गेल। भरिगर जिम्मेदारी छल। रावण ख़रीदबाक छल। संयोग सँ एकटा सेठ एहि शुभकार्य लेल अपन कारी कमाई मे सँ पांच हजार टाका भक्ति भाव सहित ओकरा द' देलक। मुदा एतबे सँ की होएत ? नीक आयोजन करबाक छलै। चारि गोटा कहलक चन्दा के रसीद बनबा लिअ। जल्दिये टाका भ' जाएत। सैह भेल। चंदाक रसीद छपबा क' छौड़ा सबके द' देल गेल। छौड़ा सब बानर भ' गेल। एकटा रसीद ल' क' रामप्रसाद सेहओ घरे- घर घूम' लागल।
घुमैत - घुमैत एकटा आलीशान बंगलाक सामने ओ रुकल। फाटक खोलि क' कॉल वेळक बटन दबेलक। भीतर स' कियो बहार नहि निकलल। ( आलीशान घर मे रह' बला आदमी ओहुना जल्दी नहि निकलैत अछि ) रामप्रसाद दोहरा क' कॉलवेळ बजेलक - ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग एहि बेर तुरन्त दरबाजा खुजल आ एकटा साँढ़ जकाँ 'सज्जन' दहाड़इते बाजल - की छै ? की चाही ? ( गोया प्रसाद पुछलक - भिखाड़ी छैं ? ) 
'' हं .... हं , हम रावणक पुतला जडेबाक लेल चन्दा एकत्रित क' रहल छी " रामप्रसाद कने सहमिते बाजल। 
" हूँ ........ चन्दा त' द' देबउ मुदा ई कह रावण कतेक साल स' जड़बैत छैं ?
" सब साल जड़बै छियै। '' रामप्रसाद जोरदैत बाजल। 
" जखन सब साल जड़बै छैं त' आखिर रावण मरै कियाक नहि छौ ? सब साल कियाक जीब जाई छौ ? कहियो सोचलहिन ? " 
" ई त' हम नहि सोचलहुँ। " रामप्रसाद एहि प्रश्न कने प्रभावित भ' गेल।
“त' आखिर कहिया सोचबै ? एह कारण छौ जे रावण कहियो मरिते नहि छौ। . . . . . . ठीक छै रसीद काटि दे।"
" ठीक छै , की नाम लिखु ? "
" लिख - - - रावण। "
" रावण ? ? ? " रामप्रसाद कने बौखलायल ।
" हँ, हमर नाम रावण अछि। की सोचैं छैं की राम राम हमरा मारि देने छल ? नहि, यहां नहि छै। दरअसलमे रामक तीर हमर ढ़ोढ़ी पर जरूर लागल छल। लेकिन हम वास्तव मे मरल नहि रहि। केवल हमर शरीर मरल छल, आत्मा नहि। गीता तू पढ़ने छैं ? हमर आत्मा कहियो नहि मरि सकैत अछि। "
"त' कि आहाँ सच्चे मे रावण छी ? हमरा विश्वास नहि होइत अछि।" रामप्रसाद भौंचक होइत बाजल।
" हँ ! त' कि तोरा आश्चर्य होइत छौ ? हेबाको चाही। मुदा सत्यके नकारल नहि जा सकैत छैक। जहिया तक संसारक कोनो कोण मे अत्याचार, साम्राज्यवाद, हिंसा आ अपहरण आ की प्रद्युमन एहन ( जे गुड़गांवक रेयान इंटरनेशन स्कूल मे भेल ) जघन्य अपराध होइत रहत तहिया तक रावण जीविते रहत। " तथाकथित रावण बाजल। ": से त' छै , मुदा - - - - ।" रामप्रसाद माथ पर स' पसीना पोछैत बाजल। " मुदा की ? रे मुर्ख ! राम त" एखनो जीविते छै। ओहो हमरे जकाँ अमर छै। ओकर नीक आ हमर अधलाहक मध्य द्वन्द त' सदैव चलैत रहत। हम जनैत छी, ने नीकक अंत हेतै आ ने अधलाहक। एहि तरहेँ तोरो चन्दा के खेल चलिते रहतौ। अच्छा आब रसीद काट। "
" अच्छा जे से कतेक लिखू ? " रामप्रसाद डेराइते बाजल। लिख, पाँच हजार। की, ठीक छौ ने ? हमर भाय धन कुबेर अछि। लाखो रुपया विदेश सँ भेजैत अछि। हमरा रुपयाक की कमी ? एकटा सोनाक लंका जड़ि गेल त' की भ' गेलै ? जयवर्धनक लंका मे एखन तक अत्याचार चलिते छै ? ई ले पाँच हजारक चेक। " रावण चेक काटि रामप्रसाद के द' देलक आ दहाड़ईत बाजल --- " चल आब भाग एतय स'।"
रामप्रसाद डेराइते बंगला सँ बाहर भागल। बाहर देखैत अछि एकटा कार ठाढ़ छै आ दू टा खूंखार गुण्डा एकटा असहाय लड़कीके खिंचैत रावणक आलिशान बंगला दिस ल' ;जा रहल छै। रामप्रसाद घबरा गेल। ओ पाँच हजार रुपयाक चेक फेर सँ जेबी स' निकालि देखलक आ सोच' लागल कि ई सच्चे रावण छल की ओकर प्रतिरूप छल ? ओकरा किछ समझ मे नहि आएल। ओ ओत' स' लंक लागि भागल ओहि मे ओकरा अपन भलाई बुझना गेलैक।
रामलीला आयोजनक अध्यक्षके जखन एहि बातक पता चलल कि रामप्रसाद लग दसहजार रुपया इकट्ठा भ' गेल त' ओ दौड़ल - दौड़ल रामप्रसाद लग गेल आ कहलक ----- " रे भाई रामप्रसाद, सुनलियौ जे चन्दा मे दसहजार रुपया जमा भ' गेलौ ? चल आई राति सुरापान कएल जाए। की विचार छौ ?"
" देखु अध्यक्ष महोदय ! ई रुपया रावणक पुतला ख़रीदबाक वास्ते अछि। हम एकरा फ़ालतूक काज मे खर्च नहि क' सकैत छी। " रामप्रसाद विनम्र भाव सँ कहलक।
अध्यक्ष गरम भ' गेलाह। बजलाह --- " वाह रे हमर कलयुगी राम ! रावण जड़ेबाक बड्ड चिन्ता छौ तोरा ? चल सबटा रुपया हमरा हवाला करै, नहि त' ठीक नहि हेतौ। "
" ख़बरदार ! जे रुपया मंगलौं त' ! आहाँके लाज हेबाक चाही। इ रुपया मौज - मस्ती के लेल नहि बुझू आहाँ ? रामप्रसाद बिगड़ैत बाजल। एतै छै चन्दाक रसीद ल' क' घूम' बला छौड़ा सभक वानर सेना। चारु कात सँ घेर क' ठाढ़ भ' गेल। रामक जीत भेल। अध्यक्ष ( जे रावणक प्रतिनिधि छल ) ओहिठाम सँ भागल। 
खैर ! रावणक पैघ विशालकाय पुतला खरीद क' आनल गेल आ विजयादशमी सँ एक दिन पहिनहि राईत क' मैदान मे ठाढ़ क' देल गेल। अगिला दिन खूब धूमधाम सँ झाँकी निकालल गेल। सड़क आ गली - कूची सँ होइत राम आ हुनकर सेना मैदान मे पहुँचल। जाहिठाम दस हजारक दसमुखी रावण मुस्कुराइत ठाढ़ छल। रावणक मुस्कुराहट एहन लागि छल बुझू ई कहि रहल हो कि " राम कहिया तक हमरा मारब' हम त' सब दिन जीबिते रहब। राम रावणक मुस्कुराहट नहि देख रहल छलाह। ओ त' जनताक उत्साह देखैत प्रसन्न मुद्रा मे धनुष पर तीर चढ़ौने रावणक पेट पर निशाना लगबक लेल तत्पर भ' रहल छलाह। कखन आयोजकक संकेत भेटत आ ओ तीर चलोओता। मुदा कमीना मुख्य अतिथि एखन तक नहि आएल छल। (ओहिना जेना भारतीय रेल सब दिन देरिये भ' जाएल करैत छैक ) आयोजक लोकनि सेहओ परेशान छलाह। आधा घंटा बीत गेल। अतिथि एलाह। आयोजकक संकेत भेल। आ ----- राम तुरन्त अपन तीर रावण दिस छोड़ि देलाह। तीर हनहनाईत पेट पर नहि छाती पर जा लागल। आ एहिकसँग धमाकाक सिलसिला शुरू भ' गेल, त' मोसकिल सँ पाँच मिनट मे सुड्डाह। बेसी रोशनीक संग रावण स्वाहा भ' गेल। ओकरा जगह पर एकटा लम्बा बाँस एखनो ठाढ़ छल। किछ लोक छाऊर उठा - उठा क' अपन घर ल' जाए लागल। (पता नै जाहि रावणके लोक जड़ा दैत छैक ओहि रावणक छाऊर के अपना घर मे कियाक रखैत अछि ?)
किछ लोक बाँस आ खपच्ची लेबक लेल सेहओ लपकल। ओहिमे एकटा रामप्रसाद सेहओ छल। लोक सब बाँस आ लकड़ी तोइर - तोइर क' बाँटि लेलक आ अपन घर दिस बिदा भ' गेल। रामप्रसाद बाँसक खपच्ची ल' क' रस्ता पर चलल जाइत छल कि एकाएक एकटा कार ओकरा लग रुकल आ एक आदमी ऊपर मुँह बाहर निकालि क' अट्टहास करैत बाजल - - - " की रावण जड़ा क ' आबि गेलौं ? एहि बेर ओ मरल की नहि ? हा - - - हा - - - हा - - - । " ओ वैह आदमी छल जे अपना आपके रावण कहैत पाँच हजार रुपयाक चेक देने छल। रामप्रसादक मुँह बन्न। घबराईते बाजल - - " जी - - - हाँ - - - हाँ - - - हाँ - - - , जड़ा देलियै। "
" मुदा ई बाँस आ खपच्ची कियाक ल' क' जा रहल छै ? रावण बाजल। " हँ , कहल जाईत छैक जे एहिसँ दुश्मन के मारला सँ ओकर हानि होइत छैक। " रामप्रसाद बाजल। " ठीक, त' एहि सँ लोक अपन बुराई के कियाक नहि अन्त क' दैत छैक ? एकरा घर मे रैखिक' तू सब रावणके जान मे जान आनि दैत छहक। तैं त' हम कहैत छी कि हम मरियो क' जीवित केना भ' जाएत छी ! रावण बाजल। ई सुनिते रामप्रसाद बाँस आ खपच्ची स' ओकरा हमला करबाक लेल लपकल, मुदा रावण कार चलबैत तुरन्त भागि गेल। ओ एखनो जीविते अछि।
कहानी का नाम : रावण मरता क्यों नहीं ?
लेखक : संजय स्वतंत्र 
पुस्तक का नाम : बाप बड़ा न भइया सबसे बड़ा रुपइया 
प्रकाशक : कोई जानकारी पुस्तक पर उपलब्ध नही
अनुदित भाषा : मैथिली 
अनुदित कर्ता : संजय झा "नागदह" 
दिनांक : 29/10 / 2017 , समय : 02 :11 am
कहानीक अनुदित नाम : रावण कियाक नहि मरैत अछि ?

Thursday, 4 May 2017

मैथिली साहित्य महासभा (ट्रस्ट) और विद्यापति डॉ० सुभद्र झा प्रेरणा मंच के तत्वावधान में बहुभाषाविद मिथिला के  युगपुरुष डॉ० सुभद्र झा के  सत्रहवाँ पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि, संगोष्ठी एवं कवी सम्मलेन के  आयोजन  हुनकर  पुण्यतिथि 13 मई 2017 के  माध्यमिक शिक्षक संघ मधुबनी में दिन के 12 बजे से आयोजन अछि ,  
      संगोष्ठी में डॉ० झा के कृतित्व और व्यक्तित्व पक्ष पर मिथिला के दिग्गज विद्वान द्वारा विचार राखल जयत ।  हिनकर  कृतित्व पक्ष पर डॉ० रामदेव झा, पंडित चंद्र नाथ मिश्र "अमर", डॉ शशिनाथ झा, श्री श्याम दरिहरे, डॉ कमला कान्त भंडारी, डॉ शंकरदेव झा, श्री अशोक कुमार ठाकुर अपन वक्तव्य  देता । व्यक्तित्व पक्ष पर डॉ भीम नाथ झा, डॉ उमाकांत झा, डॉ धीरेन्द्र नाथ मिश्र, डॉ योगानन्द झा, डॉ० श्रीशंकर झा, डॉ खुशीलाल झा, श्री उदय शंकर झा "विनोद" डॉ महेंद्र मलंगिया और डॉ विघ्नेश चंद्र झा सहित अन्य गणमान्य विद्वान् अपन - अपन विचार  रखता । 
          अहि  कार्यक्रम में मैथिली अकादमी पटना निदेशक कमलेश झा, कांग्रेस प्रवक्ता श्री प्रेम चंद्र झा, बीजेपी बिहार प्रवक्ता विनोद नायरायण झा, सांसद हुकुव नारायण यादव, समीर महासेठ, रामप्रीत पासवान, सुमन महासेठ, घनश्याम ठाकुर सहित कई अन्य राजनितिज्ञ और समाजसेवी सेहो  भाग लेता ।  कार्यक्रम के  अध्यक्षता कमला कान्त झा जी करता ।  कार्यक्रम के  परिकल्पना मैसाम के संस्थापक सदस्य संजय झा " नागदह" द्वारा कायल गेल  अच्छी ।  अहि  कार्यक्रम के संयोजक  पंडित श्री कमलेश प्रेमेंद्र और मैसाम  के अध्यक्ष उमाकांत झा बक्शी एवं  संस्था के संस्थापक सदस्य विजय झा , ब्रजेश झा , संजीव झा और राम कुमार  झा , सब  बुद्धिजीवि से आग्रह केला  की कार्यक्रम में आबि के  सफल बनाबी ।  संजय झा " नागदह"  कहला   की डॉ सुभद्र झा  एक ऐहन   मिथिला का विद्वान छैथि  जे  विद्यापति और मैथिली भाषा के  विश्व पटल पर पहुँचाबै  काम केला हन  |   

Monday, 3 April 2017

मैथिलि - हनुमान चालिसा ,हनुमान जयंती के मंगल शुभकामना अछि


  ||  मैथिलि - हनुमान चालिसा  ||
     लेखक - रेवती रमण  झा " रमण "
     ||  दोहा ||
गौरी   नन्द   गणेश  जी , वक्र  तुण्ड  महाकाय  ।
विघन हरण  मंगल कारन , सदिखन रहू  सहाय ॥
बंदउ शत - शात  गुरु चरन , सरसिज सुयश पराग ।
राम लखन  श्री  जानकी , दीय भक्ति  अनुराग । ।
 ||    चौपाइ  ||
जय   हनुमंत    दीन    हितकारी ।
यश  वर  देथि   नाथ  धनु धारी ॥
श्री  करुणा  निधान  मन  बसिया ।
बजरंगी   रामहि    धुन   रसिया ॥
जय कपिराज  सकल गुण सागर ।
रंग सिन्दुरिया  सब गुन  आगर  ॥
गरिमा   गुणक  विभीषण जानल ।
बहुत  रास  गुण  ज्ञान  बखानल  ॥
लीला  कियो  जानि  नयि पौलक ।
की कवि कोविद जत  गुण गौलक ॥
नारद - शारद  मुनि  सनकादिक  ।
चहुँ  दिगपाल  जमहूँ  ब्रह्मादिक ॥
लाल   ध्वजा   तन  लाल लंगोटा  ।
लाल   देह   भुज   लालहि   सोंटा ॥
कांधे     जनेऊ      रूप     विशाल  ।
कुण्डल    कान    केस   धुँधराल  ॥
एकानन    कपि     स्वर्ण   सुमेरु  ।
यौ    पञ्चानन    दुरमति   फेरु  ।।
सप्तानन    गुण  शीलहि निधान ।
विद्या   वारिध  वर ज्ञान सुजान ॥
अंजनि   सूत  सुनू   पवन कुमार  ।
केशरी    कंत     रूद्र      अवतार   ॥
अतुल भुजा  बल  ज्ञान अतुल अइ ।
आलसक जीवन नञि एक पल अइ ॥
दुइ    हजार   योजन   पर  दिनकर ।
दुर्गम  दुसह   बाट  अछि जिनकर ॥
निगलि गेलहुँ रवि मधु फल जानि  ।
बाल   चरित  के  लीखत   बखानि  ॥
चहुँ   दिस    त्रिभुवन  भेल  अन्हार ।
जल , थल ,  नभचर  सबहि बेकार ॥
दैवे    निहोरा   सँ    रवि   त्यागल  । 
पल  में  पलटि  अन्हरिया भागल  ॥ 
अक्षय  कुमार  के  मारि   गिरेलहुं  ।
लंका   में    हरकंप     मचयलहूँ  ॥
बालिए  अनुज   अनुग्रह   केलहु  ।
ब्राहमण   रुपे    राम मिलयलहुँ  ॥
युग    चारि    परताप    उजागर  ।
शंकर   स्वयंम   दया  के  सागर ॥
सूक्षम बिकट आ भीम रूप धारि ।
नैहि  अगुतेलोहूँ राम काज करि  ॥
मूर्छित लखन  बूटी जा  लयलहुँ  ।
उर्मिला    पति     प्राण  बचेलहुँ  ॥
कहलनि   राम  उरिंग  नञि तोर ।
तू  तउ  भाई  भरत  सन  मोर   ॥
अतबे  कहि  द्रग   बिन्दू  बहाय  ।
करुणा निधि , करुणा चित लाय ॥
जय   जय   जय बजरंग  अड़ंगी  ।
अडिंग ,अभेद , अजीत , अखंडी ॥
कपि के सिर पर धनुधर  हाथहि ।
राम  रसायन  सदिखन  साथहि ॥
आठो  सिद्धि  नो  निधि वर दान ।
सीय  मुदित  चित  देल हनुमान ॥
संकट    कोन  ने   टरै   अहाँ   सँ ।
के   बलवीर   ने   डरै   अहाँ  सँ  ॥
अधम   उदोहरन , सजनक संग ।
निर्मल - सुरसरि  जीवन तरंग ॥
दारुण - दुख  दारिद्र् भय मोचन ।
बाटे जोहि  थकित दुहू  लोचन ॥
यंत्र - मंत्र   सब तन्त्र  अहीं छी ।
परमा नंद  स्वतन्त्र  अहीं  छी  ॥
रामक  काजे   सदिखन  आतुर ।
सीता  जोहि  गेलहुँ   लंकापुर  ॥
विटप अशोक  शोक  बिच जाय ।
सिय  दुख  सुनल कान लगाय ॥
वो छथि  जतय ,  अतय  बैदेही ।
जानू  कपीस   प्राण  बिन देही  ॥
सीता ब्यथा  कथा   सुनि  कान ।
मूर्छित  अहूँ   भेलहुँ  हनुमान ॥
अरे    दशानन    एलो     काल  ।
कहि  बजरंगी   ठोकलहुँ  ताल ॥
छल दशानन  मति  के आन्हर ।
बुझलक  तुच्छ अहाँ  के  वानर ॥
उछलि कूदी कपि  लंका जारल ।
रावणक  सब  मनोबल  मारल  ॥
हा - हा   कार  मचल  लंका  में  ।
एकहि  टा  घर  बचल लंका में  ॥
कतेक  कहू  कपि की -  की कैल ।
रामजीक  काज  सब   सलटैल  ॥
कुमति के काल सुमति सुख सागर ।
रमण ' भक्ति चित करू  उजागर ॥
  ||  दोहा ||
चंचल कपि कृपा करू , मिलि सिया  अवध नरेश  ।
अनुदिन   अपनों    अनुग्रह , देबइ  तिरहुत देश ॥
सप्त   कोटि   महामन्त्रे ,  अभि मंत्रित  वरदान ।
बिपतिक   परल   पहाड़  इ , सिघ्र  हरु  हनुमान ॥

|| 2  ||
          ॥  दुख - मोचन  हनुमान   ॥ 
  जगत     जनैया  ,  यो बजरंगी  ।
  अहाँ      छी  दुख  बिपति  के संगी
  मान  चित  अपमान त्यागि  कउ ,
     सदिखन  कयलहुँ   रामक काज   । 
   संत   सुग्रीव   विभीषण   जी के,   
   अहाँ , बुद्धिक बल सँ  देलों  राज  ॥ 
   नीति  निपुन   कपि कैल  मंत्रना  
   यौ      सुग्रीव   अहाँ    कउ  संगी  
              जगत  जनैया --- अहाँ  छी दुख --

  वन  अशोक,  शोकहि   बिच सीता  
  बुझि   ब्यथा ,  मूर्छित  मन भेल  ।
  विह्बल   चित  विश्वास  जगा  कउ
  जानकी     राम     मुद्रिका    देल  ॥
  लागल  भूख  मधु र फल खयलो  हूँ
  लंका     जरलों    यौ   बजरंगी   ॥
               जगत  जनैया --- अहाँ  छी दुख--

   वर  अहिरावण  राम लखन  कउ
   बलि   प्रदान लउ   गेल  पताल  ।
   बंदि   प्रभू    अविलम्ब  छुरा कउ
   बजरंगी    कउ   देलौ कमाल  ॥
   बज्र   गदा   भुज  बज्र जाहि  तन 
     कत   योद्धा  मरि   गेल   फिरंगी  , 
             जगत  जनैया ---अहाँ  छी दुख -

 वर शक्ति वाण  उर जखन लखन , 
 लगि  मूर्छित  धरा  परल निष्प्राण । 
 वैध     सुषेन   बूटी   जा   आनल  ,
 पल में  पलटि  बचयलहऊ प्राण  ॥ 
 संकट      मोचन   दयाक  सागर , 
 नाम      अनेक ,   रूप बहुरंगी  ॥ 
       जगत      जनैया --- अहाँ  छी दुख --

नाग  फास   में   बाँधी  दशानन  , 
राम     सहित   योद्धा   दालकउ । 
गरुड़  राज कउ   आनी  पवन सुत  ,
कइल     चूर     रावण    बल  कउ 
जपय     प्रभाते    नाम अहाँ   के ,
तकरा  जीवन  में  नञि  तंगी   ॥ 
         जगत  जनैया --- अहाँ  छी दुख --

ज्ञानक सागर ,  गुण  के  आगर  ,
  शंकर   स्वयम  काल  के  काल  । 
जे जे अहाँ   सँ  बल  बति यौलक ,
ताही     पठैलहूँ   कालक   गाल   
अहाँक  नाम सँ  थर - थर  कॉपय ,
भूत - पिशाच   प्रेत    सरभंगी   ॥ 
     जगत   जनैया --- अहाँ  छी दुख -- 

लातक   भूत   बात  नञि  मानल ,
  पर तिरिया लउ  कउ  गेलै  परान । 
  कानै  लय  कुल  नञि  रहि  गेलै  , 
अहाँक   कृपा सँ , यौ  हनुमान  ॥ 
अहाँक   भोजन  आसन - वासन ,
राम  नाम  चित बजय  सरंगी  ॥ 
   जगत   जनैया --- अहाँ  छी दुख -

सील    अगार  अमर   अविकारी  ,
हे   जितेन्द्र   कपि   दया  निधान  । 
"रामण " ह्र्दय  विश्वास  आश वर ,
अहिंक एकहि  बल अछि हनुमान  ॥ 
एहि   संकट   में  आबि   एकादस ,
यौ   हमरो   रक्षा   करू   अड़ंगी  ॥ 
      जगत  जनैया --- अहाँ  छी दुख ----
|| 3 ||
हनुमान चौपाई - द्वादस नाम  
 ॥ छंद  ॥ 
जय  कपि कल  कष्ट  गरुड़हि   ब्याल- जाल 
केसरीक  नन्दन  दुःख भंजन  त्रिकाल के  । 
पवन  पूत  दूत    राम , सूत शम्भू  हनुमान  
बज्र देह दुष्ट   दलन ,खल  वन  कृषानु के  ॥ 
कृपा  सिन्धु   गुणागार , कपि एही करू  पार 
दीन हीन  हम  मलीन,सुधि लीय आविकय । 
"रमण "दास चरण आश ,एकहि चित बिश्वास 
अक्षय  के काल थाकि  गेलौ  दुःख गाबि कय ॥ 
चौपाई 
जाऊ जाहि बिधि जानकी लाउ ।  रघुवर   भक्त  कार्य   सलटाउ  ॥ 
यतनहि  धरु  रघुवंशक  लाज  । नञि एही सनक कोनो भल काज ॥ 
श्री   रघुनाथहि   जानकी  ज्ञान ।   मूर्छित  लखन  आई हनुमान  ॥ 
बज्र  देह   दानव  दुख   भंजन  ।  महा   काल   केसरिक    नंदन  ॥ 
जनम  सुकरथ  अंजनी  लाल ।  राम  दूत  कय   देलहुँ   कमाल  ॥ 
रंजित  गात  सिंदूर    सुहावन  ।  कुंचित केस कुन्डल मन भावन ॥ 
गगन  विहारी  मारुति  नंदन  । शत -शत कोटि हमर अभिनंदन ॥ 
बाली   दसानन दुहुँ  चलि गेल । जकर   अहाँ  विजयी  वैह   भेल  ॥ 
लीला अहाँ के अछि अपरम्पार ।  अंजनी    लाल    कर    उद्धार   ॥ 
जय लंका विध्वंश  काल मणि । छमु अपराध सकल दुर्गुन  गनि ॥ 
  यमुन  चपल  चित  चारु तरंगे । जय  हनुमंत  सुमित  सुख गंगे ॥  
हे हनुमान सकल गुण  सागर  ।  उगलि  सूर्य जग कैल उजागर ॥ 
अंजनि  पुत्र  पताल  पुर  गेलौं  । राम   लखन  के  प्राण  बचेलों  ॥ 
पवन   पुत्र  अहाँ  जा के लंका । अपन  नाम  के  पिटलों  डंका   ॥ 
यौ महाबली बल कउ जानल ।  अक्षय कुमारक प्राण निकालल ॥ 
हे  रामेष्ट  काज वर कयलों ।   राम  लखन  सिय  उर  में लेलौ  ॥ 
फाल्गुन साख ज्ञान गुण सार ।   रुद्र   एकादश   कउ  अवतार  ॥ 
हे पिंगाक्ष सुमित सुख मोदक ।  तंत्र - मन्त्र  विज्ञान के शोधक ॥ 
अमित विक्रम छवि सुरसा जानि । बिकट लंकिनी लेल पहचानि ॥ 
उदधि क्रमण गुण शील निधान ।अहाँ सनक नञि कियो वुद्धिमान॥ 
सीता  शोक   विनाशक  गेलहुँ । चिन्ह  मुद्रिका  दुहुँ   दिश  देलहुँ ॥ 
लक्षमण  प्राण  पलटि  देनहार ।  कपि  संजीवनी  लउलों  पहार ॥ 
दश  ग्रीव दपर्हा  ए कपिराज  । रामक  आतुरे   कउलों   काज  ॥ 
॥ दोहा ॥  
प्रात काल  उठि जे  जपथि ,सदय धराथि  चित ध्यान । 
शंकट   क्लेश  विघ्न  सकल  , दूर  करथि   हनुमान  ॥ 
|| 4 ||
  ||  हनुमान  बन्दना  ||

जय -जय  बजरंगी , सुमतिक   संगी  -
                       सदा  अमंगल  हारी  । 
मुनि जन  हितकारी, सुत  त्रिपुरारी  -
                         एकानन  गिरधारी  ॥ 
नाथहि  पथ गामी  , त्रिभुवन स्वामी  
                      सुधि  लियौ सचराचर   । 
तिहुँ लोक उजागर , सब गुण  आगर -
                     बहु विद्या बल सागर  ॥ 
मारुती    नंदन ,  सब दुख    भंजन -
                        बिपति काल पधारु  । 
वर  गदा  सम्हारू ,  संकट    टारू -
                  कपि   किछु  नञि   बिचारू   ॥ 
कालहि गति भीषण , संत विभीषण -
                          बेकल जीवन तारल  । 
वर खल  दल मारल ,  वीर पछारल -
                       "रमण" क किय बिगारल  ॥ 
|| 5 ||
       ॥ हनुमान   वंदना ॥ 

शील  नेह  निधि , विद्या   वारिध
             कल  कुचक्र  कहाँ  छी  ।
मार्तण्ड   ताम रिपु  सूचि  सागर
           शत दल  स्वक्ष  अहाँ छी ॥
कुण्डल  कणक , सुशोभित काने
         वर कच  कुंचित अनमोल  ।
अरुण तिलक  भाल  मुख रंजित
            पाँड़डिए   अधर   कपोल ॥
अतुलित बल, अगणित  गुण  गरिमा
         नीति   विज्ञानक    सागर  ।
कनक   गदा   भुज   बज्र  विराज
           आभा   कोटि  प्रभाकर  ॥
लाल लंगोटा , ललित अछि कटी
          उन्नत   उर    अविकारी  ।
  वर    बिस    भुज    अहिरावण
         सब    पर भयलहुँ  भारी  ॥
दिन    मलीन   पतित  पुकारल
        अपन  जानि  दुख  हेरल  ।
"रमण " कथा ब्यथा  के बुझित हूँ
           यौ  कपि  किया अवडेरल
|| 6 ||
          ||  हनुमान - आरती  ||
आरती आइ अहाँक  उतारू , यो अंजनि सूत केसरी नंदन  । 
अहाँक  ह्र्दय  में सत् विराजथि ,  लखन सिया  रघुनंदन   
             कतबो  करब बखान अहाँ के '
            नञि सम्भव  गुनगान  अहाँके  । 
धर्मक ध्वजा  सतत  फहरेलौ , पापक केलों  निकंदन   ॥ 
आरती आइ ---  , यो  अंजनि ---- अहाँक --- लखन ---
          गुणग्राम  कपि , हे बल कारी  '
          दुष्ट दलन  शुभ मंगल कारी   । 
लंका में जा आगि लागैलोहूँ , मरि  गेल बीर दसानन  ॥ 
आरती आइ ---  , यो  अंजनि ---- अहाँक --- लखन ---
         सिया  जी के  नैहर  , राम जी के सासुर  '
         पावन     परम   ललाम   जनक पुर   । 
उगना - शम्भू  गुलाम जतय  के , शत -शत  अछि  अभिनंदन  ॥ 
आरती आइ ---  , यो  अंजनि ---- अहाँक --- लखन ---
           नित     आँचर   सँ   बाट      बुहारी  '
          कखन   आयब   कपि , सगुण  उचारी  । 
"रमण " अहाँ के  चरण कमल सँ , धन्य  मिथिला के आँगन ॥ 
 आरती आइ ---  , यो  अंजनि ---- अहाँक --- लखन ---




रचैता -
रेवती रमण झा " रमण "
ग्राम - पोस्ट - जोगियारा पतोर
आनन्दपुर , दरभंगा  ,मिथिला
मो 09997313751

Organisations founded by DR. Dhanakar Thakur, MBBS, MD(Gen Med),DCH, 9843376861

Organisations founded by DR. Dhanakar Thakur 9843376861,9430141788, dhanakar@gmail.com -(italics not running at present)_ Those interested to work in any/ other organisation may consult me: Mithila related 26 organsiations plus_
1.       Hindustan Republic an Army_ 1968(On imitation of Pt. Bismil and Chandrashekhar Azad( yet, a new organisation for remembering  revolutionaries of Indian Independence is a must and am exploring some young  for it.
2.       Keshav Pustakalay (on  RSS founder)-1968(A series on RSS great workers as books RASTRA RATN SERIES is under process- Write on Dr. Abaji Thatte, Dr. Sujit Dhar, Rajju Bhaiya, Sudarshanji, Moropant Pingle, Krishnrao Moharir,Suryanarayan Rao, Bapatji, Madhusudan Gopal Dev, Shrishankar Tiwari, Narsingh Dwivedi, Kashinath Mishra, Nawalkishor das, Vasant Agase, Rajabhau Sawargaonkar, Durgadas Rathor, Kailashpati Mishra,etc.
3.       National Medicos Organisation_5.11.1977(Varansi)- my prime work
4.       Aayurvigyan Pragati ( darbhanga 1981, released at Ranchi 23.4.1981)_ 53rd issue
5.       Vivekanad  swadhyay mandal(Study Circle )( Ranchi_18.12.1993) with Abash K Chatterjee etc. _ monthly meeting on books read)
6.       National Software Engineers’ Organisation(NSWEO)_ Banglaore  22.7.2007
7.       Abhas Smriti Manch_ranchi, 21.1.2015
8.       Aadarsh Ramganga Party( Bareilly _ 2017under process)
9.       Bhartiya Lipi Parishad(Unnao, UP,26.2.2017)
10.   Narional Engineers’ Organisation (Darbhanga Engineering College Hostel, 23.3.2017)
11.   Political parties for Awadh Pradesh, Jharkhand, Sonbhadra, Bundelkhand, Delhi under consideration, maybe for some other states like Bhojpur, Magadh etc.

Mithila related  Organisations founded by DR. Dhanakar Thakur 09843376861-(italics not running at present)_ Those interested to work in any/ other organisation may consult me: Mithila related 26 organsiations
1.       Antarrashtriy Maithili Parishad_Ranchi 20.6.1993 and its affiliates
2.       Mithila Rajya Sangharsh Samiti_Patna, 8.1.1995(Mithila Rajya sangharsh Samiti founded  with Jaikant babu as its president( though could not be declared by me when Vivekand GSEcy Chetana samiti had hot words with me when he asked all to go work for Yugeshwar Jha, candidate from Benipatti and I could declare his name only on 8.1.1996 at Madhubani in II Antarrashtriy Sammelan)
3.       Maithili Sandesh_ 1994 October
4.       Maithili Manch, Harmu_21.12.1997( jahi me  bad me Jharkhand hamra dwara 2000 me jodal gel)
5.       Mithila Rajya Nirman Samiti, Jhanjharpur,25.8.2013
6.       Mithilakshar Pracharini Sabha_Darbhanga_23.12.2013
7.       Mithila Bal Parishad, Chakia, Begusarai_14.12.2013
8.       Mithila Vidyarthi Parishad_ Saharsha_12.3.2005
9.       Mithila Vanijya Chhatra Parishad_ Rajendra Chhatravas, Kolkata_26.1.2001
10.   Yuva Mithila_ Bangao, Saharsa_24.4.2015
11.   Mithila Vikas Party  (Muzaffarpur Vishnukantji s vichar_4.10.2008, Kajubabu dera,Lalit MohanThakur s Arariya  me vichar_18.12.2007,  Patna Pustak mela me banal 13.12.2008),
12.   Akhil Bhartiy Mithila Party(17.9.2010 regd)_(since 23.6.2013, Bihat cut off  from AMP )
13.   Aadarsh Mithila Party( 26.3.2014 regd.)
14.   Katha Kumbh _ 1.3.2015, Rahua(Madhubani)
15.   Mithila Sanskrit Parishad_ 17.4.2016 Udghatan Yajynavalkya Chhtravas, KSSDU, Darbhanga

16.   Udyog Mithila_ Simariaghat_25.11.2015 sweekriti , Udghatan ,Darbhanga_17.4.2016

17.   Mithila Adhwakta Manch_2.10.1994, Chadraprakashji,Ranchi,  kintu udghatan Laheriasarai court,  Darbhnaga_16.10.2016
18.   Mithila Shiksha Manch_Simariaghat_25.11.2015 sweekriti. 16.10.2016,Misartola  Darbhanga. Pratham karyakram,
19.   Mithila Mahila Parishad_Darbhanga_20.10.2016 pratham karyakram
20.   Mithila Vyavsayee Manch_ Darbhanga_20.10.2016  pratham karyakram
21.   Mithila Muslim Manch_ Patepur(Samastipur)_20.11.2016
22.   Mithila Patrakar Manch_1995
23.   Maithili Shikshak sangh_Muzaffarpur_ 26.3.2017 k vichar
24.   Mithila kala Manch_Devghar_2015
25.   Mithiula Dalit Manch
26.   Vachaspati Pustakaly_Ranchi ( will be transferred to Darbhanga soon)
27.   Mithila Sahityakar Parishgad_31.3.2017 k Ghoshana
REVIVED
1.       Vidyapati Smarak Samiti,Rranchi by sending 217 postcards  on 31.12.1993 and calling a meeting at the residence of IN Jha in Jawaharnagar colony, Ranchi on 16.1.1994
2.       Maithil Sangh, Chennai _ 21.1.1996 at Hotel Annapurna, Nr.Chennai Egmore station ( had visited door to door during 18-21,1995 at Velankini etc. sating at IIT, Chennai as a guest of Shrish Choudhary for it)
3.       Mithila sanskritik parishad, Visakhapattanam 6.2.1993, 15.6.2002

There may be some ore which needs memory recall.

Mithila related Organisations founded(and revived) by Dr. Dhanakar Thakur 09843376861,

Mithila related  Organisations founded by Dr. Dhanakar Thakur 09843376861, 09430141788, dhanakar@gmail.com -(italics not running at present)_ Those interested to work in any/ other organisation may consult me: Mithila related 26 organsiations
1.       Antarrashtriy Maithili Parishad_Ranchi 20.6.1993 and its affiliates
2.       Mithila Rajya Sangharsh Samiti_Patna, 8.1.1995(Mithila Rajya sangharsh Samiti founded  with Jaikant babu as its president( though could not be declared by me when Vivekand GSEcy Chetana samiti had hot words with me when he asked all to go work for Yugeshwar Jha, candidate from Benipatti and I could declare his name only on 8.1.1996 at Madhubani in II Antarrashtriy Sammelan)
3.       Maithili Sandesh_ 1994 October
4.       Maithili Manch, Harmu_21.12.1997( jahi me  bad me Jharkhand hamra dwara 2000 me jodal gel)
5.       Mithila Rajya Nirman Samiti, Jhanjharpur,25.8.2013
6.       Mithilakshar Pracharini Sabha_Darbhanga_23.12.2013
7.       Mithila Bal Parishad, Chakia, Begusarai_14.12.2013
8.       Mithila Vidyarthi Parishad_ Saharsha_12.3.2005
9.       Mithila Vanijya Chhatra Parishad_ Rajendra Chhatravas, Kolkata_26.1.2001
10.   Yuva Mithila_ Bangao, Saharsa_24.4.2015
11.   Mithila Vikas Party  (Muzaffarpur Vishnukantji s vichar_4.10.2008, Kajubabu dera,Lalit MohanThakur s Arariya  me vichar_18.12.2007,  Patna Pustak mela me banal 13.12.2008),
12.   Akhil Bhartiy Mithila Party(17.9.2010 regd)_(since 23.6.2013, Bihat cut off  from AMP )
13.   Aadarsh Mithila Party( 26.3.2014 regd.)
14.   Katha Kumbh _ 1.3.2015, Rahua(Madhubani)
15.   Mithila Sanskrit Parishad_ 17.4.2016 Udghatan Yajynavalkya Chhtravas, KSSDU, Darbhanga

16.   Udyog Mithila_ Simariaghat_25.11.2015 sweekriti , Udghatan ,Darbhanga_17.4.2016

17.   Mithila Adhwakta Manch_2.10.1994, Chadraprakashji,Ranchi,  kintu udghatan Laheriasarai court,  Darbhnaga_16.10.2016
18.   Mithila Shiksha Manch_Simariaghat_25.11.2015 sweekriti. 16.10.2016,Misartola  Darbhanga. Pratham karyakram,
19.   Mithila Mahila Parishad_Darbhanga_20.10.2016 pratham karyakram
20.   Mithila Vyavsayee Manch_ Darbhanga_20.10.2016  pratham karyakram
21.   Mithila Muslim Manch_ Patepur(Samastipur)_20.11.2016
22.   Mithila Patrakar Manch_1995
23.   Maithili Shikshak sangh_Muzaffarpur_ 26.3.2017 k vichar
24.   Mithila kala Manch_Devghar_2015
25.   Mithiula Dalit Manch
26.   Vachaspati Pustakaly_Ranchi ( will be transferred to Darbhanga soon)
27.   Mithila Sahityakar Parishgad_31.3.2017 k Ghoshana
REVIVED
1.       Vidyapati Smarak Samiti,Rranchi by sending 217 postcards  on 31.12.1993 and calling a meeting at the residence of IN Jha in Jawaharnagar colony, Ranchi on 16.1.1994
2.       Maithil Sangh, Chennai _ 21.1.1996 at Hotel Annapurna, Nr.Chennai Egmore station ( had visited door to door during 18-21,1995 at Velankini etc. sating at IIT, Chennai as a guest of Shrish Choudhary for it)
3.       Mithila sanskritik parishad, Visakhapattanam 6.2.1993, 15.6.2002

There may be some ore which needs memory recall.